वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2021-22 के वित्तीय वर्ष के लिए पेश किए गए बजट में एलान किया है|कि सरकार अगले वित्तीय वर्ष कुछ सरकारी कंपनियों को बेचकर 1.75 लाख करोड़ रुपये जुटाएगी| सरकार अपनी जिन कंपनियों को बेचेगी| उनमें से कुछ को पूरी तरह बेच दिया जाएगा|जबकि कुछ कंपनियां आंशिक रूप से बेची जाएंगी| वहीं, कुछ सरकारी कंपनियों के आईपीओ के जरिये पैसा जुटाया जाएगा| पिछले वर्ष के बजट भाषण में निर्मला सीतारमण ने इसी प्रकार के विनिवेश से 2.1 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा था| इनमें 1.2 लाख करोड़ रुपये पब्लिक सेक्टर की कंपनियों के विनिवेश से| जबकि 90 हजार करोड़ रुपये वित्तीय संस्थाओं में अपनी हिस्सेदारी बेच कर जुटाए जाने थे|
लेकिन कोविड-19 महामारी और उसकी वजह से लगे लाॅकडाउन के कारण कामकाज लगभग ठप पड़ गया और ये कवायद रुक गई, साथ ही बेचे जाने वाले कंपनियों के बिजनेस और उनकी आर्थिक स्थिति में भी गिरावट आई| इसलिए अब सरकार ने अपने टार्गेट को रिवाइज करते हुए 2.1 लाख करोड़ रुपये की जगह 1.75 लाख करोड़ रुपये जुटाना निर्धारित किया है|

सरकार ने विनिवेश के प्रोसेस को आसान बनाने के लिए वित्त मंत्रालय के अंतर्गत एक विभाग भी बना रखा है| नाम है निवेश और लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग या DIPAM (दीपम)यहां कंपनियों में हिस्सेदारी बेचे जाने के 2 तरीके अपनाए जाते हैं|

पहला: विनिवेश यानी सरकार द्वारा अपनी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचकर. सामान्यतः सरकार की इस हिस्सेदारी को निजी क्षेत्र की कंपनियां खरीदती हैं|

दूसरा: आईपीओ निकालकर. इसके तहत सरकार अपनी कंपनियों के कुछ शेयर आम लोगों के लिए शेयर मार्केट में उतार देती है| मिसाल के लिए मान लेते हैं कि भारतीय जीवन बीमा निगम यानी LIC के 10 प्रतिशत IPO (इनीशियल पब्लिक ऑफर) निकाले गए. यानी सरकार ने LIC में अपनी कुल हिस्सेदारी का 10 प्रतिशत शेयर मार्केट के माध्यम से आम लोगों को बेच दिया और पैसे कमा लिए|

विनिवेश से जुटाया गया पैसा बजट की कैपिटल साइड यानी पूंजीगत खाते में आता है. सरकार इस पैसे को देश के ढांचागत विकास यानी रेलवे, हाइवे, स्कूल, अस्पताल, पोर्ट आदि बनाने पर खर्च करती है|

भारत पेट्रोलियम एवं देश की 9 अन्य पब्लिक सेक्टर की कंपनियां महारत्न कैटेगरी में आती हैं.

अब बात करते हैं,  उन कंपनियों की जिन्हें सरकार पूरी तरह या आंशिक रूप से बेचने जा रही है, इनमें सबसे बड़ी सरकारी कंपनी भारत पेट्रोलियम काॅर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) है, इस कंपनी को ‘महारत्न’ कंपनी का दर्जा हासिल है| अब आप पूछेंगे की महारत्न कंपनी क्या होती है?

दरअसल देश में सरकारी कंपनियों की 3 कैटेगरी है: महारत्न, नवरत्न और मिनीरत्न;-
  1.  महारत्न कैटेगरी में पब्लिक सेक्टर की सबसे बड़ी कंपनियां आती हैं, जैसे इंडियन ऑयल, ONGC, BPCL आदि.
  2.  नवरत्न कैटेगरी में मंझोले आकार की सरकारी कंपनियों को रखा गया है.
  3. वहीं, मिनीरत्न कैटेगरी में छोटी सरकारी कंपनियां आती हैं.
महारत्न का दर्जा उन्हीं कंपनियों को दिया जाता है, जो निम्नलिखित शर्तों को पूरा करती हैं:-
1. कंपनी को पहले से नवरत्न कंपनी का दर्जा प्राप्त होना चाहिए,
2. भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी SEBI के नियामकों के तहत न्यूनतम निर्धारित सार्वजनिक हिस्सेदारी (Minimum Prescribed Public Shareholding) के साथ भारतीय शेयर बाजार में लिस्टेड हों|
3.कंपनी का पिछले 3 सालों का औसत वार्षिक व्यवसाय (Average Annual Turnover) 25,000 करोड़ रुपये से अधिक का होना चाहिए|
4. पिछले 3 वर्षों में कंपनी का एवरेज नेट वर्थ  15,000 करोड़ रुपये से अधिक होना चाहिए|
5. पिछले 3 वर्षों में कंपनी का औसत वार्षिक शुद्ध लाभ 5,000 करोड़ रुपये से अधिक होना चाहिए|
6. कंपनी का इंटरनेशनल मार्केट में ठीक-ठाक प्रदर्शन होना चाहिए|

इन सब शर्तों पर पब्लिक सेक्टर की 10 कंपनियां खरी उतरती हैं| BPCL उन्हीं में से एक है| जिसके विनिवेश की प्रक्रिया अगले साल तक पूरा होने की बात की गई है| कंपनी में सरकार की हिस्सेदारी लगभग 53 प्रतिशत है| 2019 में सरकार ने फैसला किया था कि वो इस कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बेच देगी| आम लोगों और विपक्षी दलों में सबसे ज्यादा चर्चा BPCL के विनिवेश की ही होती है| हालांकि विनिवेश की जाने वाली बाकी कंपनियों में शिपिंग कार्पोरेशन ऑफ इंडिया, कंटेनर कार्पोरेशन ऑफ इंडिया, नीलांचल इस्पात निगम लिमिटेड आदि शामिल हैं| लेकिन लोग इनके बारे में ज्यादा नहीं जानते| इसका एक कारण ये भी है कि ये सब मंझोले और छोटे आकार की कंपनियां हैं| यानी नवरत्न और मिनीरत्न कैटेगरी में आती हैं|

IDBI बैंक में भी सरकार अपनी हिस्सेदारी बेचेगी.

अब बात करते हैं विनिवेश और आईपीओ के दायरे में आने वाली वित्तीय संस्थाओं की.

इसमें पहला और सबकी जुबान पर चढ़ा नाम है LIC का. वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में घोषणा की है कि सरकार LIC के ‘कुछ शेयर’ बाजार में बेचेगी. लेकिन इसके लिए सरकार विनिवेश का तरीका नहीं अपनाएगी यानी किसी दूसरी कंपनी को डायरेक्ट शेयर नहीं बेचे जाएंगे. बजाय इसके LIC का IPO निकाला जाएगा और शेयर मार्केट के बाकी शेयरों की तरह ये आम लोगों के लिए उपलब्ध होगा| वित्त मंत्री ने अपने पिछले वर्ष के बजट भाषण में भी इसकी घोषणा की थी. लेकिन कोरोना की वजह से कुछ हो नहीं पाया. अब वित्त मंत्री ने अपनी उसी घोषणा को पुनः दोहराया है.

भारतीय जीवन बीमा निगम देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी है.

LIC के साथ-साथ IDBI बैंक में भी सरकार ने अपनी हिस्सेदारी बेचने का एलान किया है| वर्तमान में IDBI बैंक में सरकार की हिस्सेदारी 46 प्रतिशत से ज्यादा है. सरकार ने ये भी कहा है |   कि सार्वजनिक क्षेत्र के 2 बैंकों का निजीकरण किया जाएगा. हालांकि भाषण में वित्त मंत्री ने इन दोनों बैंको का नाम नहीं बताया है| शायद ऐसा इन बैंकों के कर्मचारियों द्वारा हंगामा किए जाने की आशंका को देखते हुए किया गया हो|

 

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